II. हितलाभ
1. अस्पताल नकद हितलाभ (एच.सी.बी.): दुर्घटनावश अथवा किसी बीमारी के कारण शारीरिक क्षति होने पर अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में दैनिक हितलाभ देय है : हितलाभ की राशि क्रय की गई पॉलिसी के आकार पर निर्भर होगी।
बीमित व्यक्ति
आरंभिक दैनिक हितलाभ (आई.डी.बी.) * #
न्यूनतम
अधिकतम
प्रमुख बीमित व्यक्ति
रु. 250
रु. 2500
पति/पत्नी/बच्चा
रु. 250
रु. 1500
* लागू दैनिक हितलाभ आ.दै.हि. (आई.डी.बी.) जोखिम सुरक्षा के प्रथम वर्ष में ही लागू होगा। दैनिक हितलाभ में प्रत्येक पॉलिसी वर्षगाँठ पर प्रतिवर्ष 5% की साधारण दर से वृद्धि होगी जिसकी अधिकतम सीमा आरंभिक हितलाभ का 1.5 गुणा है।
पति/पत्नी का आरंभिक दैनिक हितलाभ प्रमुख बीमित व्यक्ति के आरंभिक दैनिक हितलाभ से अधिक नहीं हो सकता। बच्चों का आरंभिक दैनिक हितलाभ प्रमुख बीमित व्यक्ति के आरंभिक दैनिक हितलाभ पति/पत्नी के आरंभिक दैनिक हितलाभ से अधिक नहीं हो सकता।
पॉलिसी की अवधि उस पॉलिसी वर्षगाँठ तक है जब प्रमुख बीमित व्यक्ति की निकटतम जन्मदिन पर आयु 65 वर्ष हो।
आरंभिक अस्पताल नकद हितलाभ (एच.सी.बी.) अनिवार्य रूप से रु. 50/- के गुणकों में होना चाहिए।
# आरंभिक दैनिक हितलाभ गैर – ग.प.इ. (नॉन-आई.सी.यू.) कक्ष अथवा रोगीकक्ष (वॉर्ड) में रहने हेतु देय होगा। यदि बीमित व्यक्ति को अस्पताल की गहन इकाई परिचर्या इकाई (आईसीयू) में रहना पड़ता है तो दैनिक हितलाभ की विस्तारित दर देय होगी जो देय दैनिक नकद हितलाभ से दुगुनी होगी।
2. वृहत् शल्यक्रिया हितलाभ (एम.एस.बी.) : बीमित व्यक्ति द्वारा पृ. 4 पर दी तालिका में वर्णित कोई वृहत् शल्यक्रिया (मेजर सर्जरी) करवाने की स्थिति में सूची में उस शल्यक्रिया के सामने दी बीमा राशि के प्रतिशत के समकक्ष एकमुश्त हितलाभ उसे देय होगा परंतु इसके लिए उसे निगम को संतोषजनक प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
3. आवासीय चिकित्सा हितलाभ (डी.टी.बी.) : प्रमुख बीमित व्यक्ति स्वयं अथवा इस पॉलिसी के अंतर्गत बीमित अन्य सदस्यों हेतु स्वास्थ्य चिकित्सा पर की वास्तविक व्यय धनराशि अथवा अस्पताल नकद। वृहत् शल्यक्रिया हितलाभ से अधिक व्यय की धनराशि भरने हेतु उसकी समकक्ष धनराशि की निकासी कर सकता है।
दावा योग्य न्यूनतम आवासीय चिकित्सा हितलाभ
रु. 2500
दावा योग्य/देय* अधिकतम धनराशि
भुगतान तिथि पर पॉलिसी निधि के 50% का दावा किया जा सकता है।
1. उपरोक्त शर्तों के अधीन तथा चिकित्सा संबंधी साक्ष्य तथा व्यय के बिलों के प्रस्तुत करने पर एक पॉलिसी वर्ष में अधिकतम दो भुगतान किए जा सकते हैं। कम से कम तीन वर्षों तक प्रीमियम का भुगतान करने पर ही आ.चि.हि.(डी.टी.बी.) उपलब्ध होगा। 2. बीमित बच्चों को स्वास्थ्य समाप्त होने की आयु तक आ.चि.हि. (डी.टी.बी.) देय है।
4. मृत्यु उपरांत हितलाभ : इस योजना के अंतर्गत कोई मृत्यु बीमा सुरक्षा उपलब्ध नहीं है। प्रमुख बीमित व्यक्ति (पी.आई.) तथा/एवम् अन्य बीमित सदस्यों की मृत्यु की स्थिति में निम्नलिखित हितलाभ/प्रभार घटित होंगे।
1.जहाँ पॉलिसी के अंतर्गत केवल एकल जीवन (प्रमुख बीमित व्यक्ति) ही बीमित है :
प्रमुख बीमित व्यक्ति के वैध उत्तराधिकारी/यों अथवा नामित व्यक्ति को पॉलिसी निधि में उपलब्ध यूनिटों का निधि मूल्य देय है।
2. जहाँ पॉलिसी के अंतर्गत दो अथवा दो से अधिक व्यक्ति बीमित हैं :
जहाँ पॉलिसी की आरंभ तिथि से तीन वर्ष के उपरांत प्रमुख बीमित व्यक्ति की मृत्यु हुई है। तो पॉलिसी समाप्त हो जाएगी तथा नामित व्यक्ति/वैध उत्तराधिकारी को पॉलिसी निधि मूल्य देय होगा।
जहाँ पॉलिसी की आरंभ तिथि से तीन वर्ष के भीतर प्रमुख बीमित व्यक्ति की मृत्यु हुई है। प्रीमियम भुगतान की समाप्ति हो जाएगी परंतु अन्य बीमित सदस्यों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा, यदि कोई है, तो जब तक प्रभारों की वसूली के लिए पर्याप्त निधि है अथवा सुरक्षा की समाप्ति की आयु, जो भी पहले हो, तब तक चालू रहेगी।
3. प्रमुख बीमित व्यक्ति के अतिरिक्त अन्य बीमित सदस्यों की मृत्यु पर :
इस पॉलिसी के अंतर्गत बीमित अन्य सदस्यों हेतु प्रीमियम भुगतान के साथ-साथ जोखिम सुरक्षा भी जारी रहेगी।
4. सभी बीमित सदस्यों की मृत्यु पर :
प्रमुख बीमित व्यक्ति के नामित व्यक्ति अथवा वैध उत्तराधिकारी को पॉलिसी निधि में उपलब्ध यूनिटों का निधि मूल्य देय होगा।
5. पॉलिसी आरंभ तिथि से तीन वर्षों के उपरांत प्रमुख बीमित व्यक्ति तथा उसके पति/पत्नी (पॉलिसी के अंतर्गत बीमित हों अथवा न हों) की मृत्यु पर :
बीमित बच्चे यदि हैं, के लिए हितलाभ जारी रहेंगे तथा पॉलिसी के अंतर्गत बीमित सबसे बड़े बालिग बच्चे द्वारा इसका दावा किया जा सकता है। यदि सभी बीमित बच्चे नाबालिग हैं तो वैध अभिभावक स्वास्थ्य सुरक्षा हितलाभ का दावा कर सकते हैं।
छूट पर निषेध बीमा अधिनियम 1938 की धारा 41 (1) भारत में कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी व्यक्ति को जीवन अथवा जोखिम संबंधी बीमा लेने, नवीकरण करने अथवा उसे जारी रखने के लिए प्रलोभन हेतु अथवा देय कमीशन का पूर्ण अथवा आंशिक भाग अथवा पॉलिसी पर वर्णित प्रीमियम पर कोई छूट नहीं दे सकता सिवाय उस छूट के जो बीमाकर्ता के विवरण पत्र अथवा सूची में प्रकाशित है बशर्ते बीमा अभिकर्ता द्वारा स्वयं के जीवन पर स्वयं द्वारा ली गई जीवन बीमा पॉलिसी से संबंधित कमीशन की प्राप्ति को इस उपधारा के अंतर्गत प्रीमियम में छूट की स्वीकृति नहीं माना जाएगा यदि बीमा अभिकर्ता द्वारा ऐसी स्वीकृति निर्धारित शर्तों की संतुष्टि करती है जिसमें यह बताया गया है कि वह बीमाकर्ता द्वारा नियुक्त एक वास्तविक बीमा अभिकर्ता है। (2) इस धारा के प्रावधानों के कार्यान्वयन का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को दंडित किया जाएगा। यह दंड पाँच सौ रुपए तक भी हो सकता है।